हैप्पी बर्थ डे कसाब
Written by: शशि सिंह | November 26, 2009 | Category: पिंटो को गुस्सा क्यों आता है | 2 Comments
कसाब भाई, जन्मदिन मुबारक हो! याद आया? आज ही तो आपका पहला जन्मदिन है… आज 26 नवम्बर है! आज पूरे एक साल हो गये आपके जन्मदिन का जश्न मनाते हुये… ये जश्न ज्यादा भव्य तो नहीं रहा, हम आपके लिए अभी तक सिर्फ 31 करोड़ रुपये ही खर्च सके। आपकी खातिरदारी में कोई कमी रह गई हो तो पूरे हिन्द के तरफ से आपसे माफी चाहते हैं… उम्मीद है आप और आपके बाप हमें माफ कर देंगे।
इंडियन पॉलिटिकल लीग: फोटो कॉपी बनाम ओरिजनल
Written by: शशि सिंह | May 17, 2009 | Category: ढाक के तीन पात | 3 Comments
ग्रेट इंडियन पॉलिटिकल लीग का फाइनल संपन्न हुआ। नतीजों से पहिले कहां तो फोटो फिनिश की उम्मीद लगाई जा रही थी मगर कांग्रेसी बालक राहुल बाबा के मुकाबले भाजपा का बुजुर्गवार नेतृत्व न सिर्फ अक्षम नज़र आया बल्कि हांफता हुआ काफी पीछे छूट गया। कठपुतली प्रधानमंत्री मजबुत नेता पर निर्णायक रूप से भारी पड़ते हुये एक बार फिर से सरकार बनाने जा रहे हैं। कांगेसनीत गठबंधन को जीत की बधाई! मगर इसे कांगेस की जीत से ज्यादा मैं भाजपा की हार मानता हूं।
क्रिकेट के दीवानों अपना हीरो चुनो
Written by: शशि सिंह | January 7, 2009 | Category: जिन्दगी ऑनलाइन | 4 Comments
यदि आप क्रिकेट के दीवाने हैं… दीवाने न सही क्रिकेट को पसंद करने वाले भी हैं तो यह ख़बर आपके लिए ही है। क्रिकेट की मशहूर वेबसाइट क्रिकइंफो डॉटकॉम ने 2008 में खेली गई अच्छी क्रिकेट को सम्मानित करने का फैसला किया है। इसके लिए खिलाड़ियों को दो तरह के सम्मान दिये जायेंगे। एक जिसका चयन क्रिकइंफो की जूरी करेगी और दूसरा यानी कि लोकप्रिय श्रेणी में 2008 के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों को चुनने की जिम्मेदारी क्रिकेटप्रेमियों यानी कि आप पर डाली है।
नौकरी चाहिये तो हिन्दी पढ़ो
Written by: शशि सिंह | January 4, 2009 | Category: ढाक के तीन पात | 3 Comments
क्या आप जानते हैं महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री की नौकरी जाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता आर.आर. पाटील इन दिनों क्या कर रहे हैं? इन दिनों वे अपनी हिन्दी सुधारने लगे हैं। आबा के नाम से मशहूर श्री पाटिल को मलाल है कि उनकी हिन्दी अच्छी नहीं होने के कारण उनके बयानों को गलत संदर्भ में लिया गया जिससे उनकी नौकरी चली गई। मतलब ये कि उन्होंने जो कुछ भी ग़लत हिन्दी में कहा उसका मतलब कुछ और था। (अब चलिये मतलब आप हिन्दी सीखकर कभी समझा दीजियेगा।)
ब्लॉग बना चिट्ठा, जम गई चिट्ठाकारिता
Written by: शशि सिंह | October 24, 2007 | Category: जिन्दगी ऑनलाइन | Comment
इंटरनेट पर इन दिनों ब्लॉगिंग की खूब चर्चा है, हालाँकि इसकी शुरुआत तकरीबन दस साल पहले अँग्रेजी में हुई थी मगर अब हिंदी लिखने-पढ़ने वालों में भी यह विधा लोकप्रिय हो चली है. ब्लॉग यानी इंटरनेट पर डायरीनुमा व्यक्तिगत वेबसाइटें, जिसके लिए हिंदी में ‘चिट्ठा’ नाम प्रचलित और स्थापित हो चुका है. महज साढ़े चार साल पहले हिंदी ब्लॉग लेखन की शुरुआत हुई थी और आज हिंदी चिट्ठों की तादाद हज़ार से ऊपर है.
ख़बरें जो बेख़बर नहीं होने देतीं
Written by: शशि सिंह | January 2, 2007 | Category: सलाम ठोकता हूं | 2 Comments
ऐसा कम ही होता है कि आजतक (वो अपना सबसे तेज़) न्यूज़ चैनल कभी पते बात करे. वह दुर्लभ नजारा मुझे साल 2007 के पहले दिन ही देखने को मिल गया. वो ऐसा शायद इसलिए हो पाया होगा कि पहली जनवरी होने की वजह से बॉसेस छूट्टी पर होंगे और न्यूज़ रूम में अपने नीरज दीवान भाई जैसे टीवी के दबे-कुचले पत्रकारों को अपनी पत्रकारिता दिखाने का मौका मिल गया होगा.


