खाली हाथ


Written by: शशि सिंह | June 13, 2005 | Category: तन्हा जब होता हूं | Comment 

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न देख इन हाथों को
इस कदर हिकारत से
गर मिल जाए एक पत्थर भी इसे
भगवान बना देते हैं
सजदा करता है तू जिन जवाहरात का
कभी पड़े थे इन्हीं हाथों में एक पत्थर की तरह

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