प्रधानमंत्री बनना अभी पैंडिग में है
Written by: शशि सिंह | December 29, 2006 | Category: हंसी-ठिठोली | 3 Comments
मैं अपने किसी योजना का खुलासा नहीं कर रहा हूं… ये तो हमारे माननीय रेलमंत्री श्री लालू प्रसाद यादवजी का मामला है. जी हां ये वही लालू जी हैं जो बिहार में 15 साल तक अपने (पत्नी का भी) ‘कु’शासन के लिए कुख्यात रहे हैं इन दिनों रेलमंत्री के रूप में खूब नाम कमा रहे हैं. भले ही नीतिश कुमार कहते फिरें कि रेलवे की ये सलफता उनकी मेहनत का नतीजा है पर आज सच तो यही है कि कामयाबी के सेहरे का कपड़ा लालू ले उड़े हैं और अपनी मर्जी से अलग-अलग डिजाइन का सेहरा पहन रहे हैं. वैसे नीतिश बाबू घबराइये मत, आप ब्रांड बिहार को चमकाइये. जब आपका ये प्रोडक्ड चमक जायेगा तो मेड बाय लालू का मोहर लगाने के लिए लालूजी आइये जायेंगे.
चरवाहा विद्यालय वाली उनकी योजना तो फ्लॉप हो गई मगर लगता है कि मैनेजमेंट विद्यालय योजना रंग ला रही है. तभी तो पहिले हिन्दुस्तानी आईआईएम और अब विदेशी हावर्ड. भई कुछ तो बात है बंदे में. भले ही लोग बिहार की तबाही का जिम्मेदार श्री लालू को बतायें, मगर मैं तो उन्हें बिहारियों की तरक्की का सूत्रधार मानता हूं. बिहारियों को लोग अक्खड़ कहते थे… लम्पट भी कहते थे… मगर कभी भी किसे ने बिहारियों की प्रतिभा को लेकर सवाल नहीं किया. आज लालूजी की बदौलत ही बिहारियों को अपनी यह यह प्रतिभा संवारने का मौका मिला. चकराइये मत, मैं सोलह आने सच कह रहा हूं. वैसे तो बिहारियों के प्रवासी होने का इतिहास तो काफी पुराना है मगर जो लोग किसी न किसी उम्मीद या लगाव में बिहार में जमें हुए थे वे भी लालूजी की ही प्रेरणा से बिहार से पलायन करने को मजबूर हुए.
आज हर तरफ जो बिहारी प्रतिभाओं की बात होती है दरअसल ये वो मजबूर लोग हैं जिनके सामने प्रवासी होने का कुंआ और पीछे लालू के कुशासन की खाई थी… मरता क्या करता? आप ही देखिये न… आज लगभग हर सफल बिहारी की सफलता की कहानी बिहार से बाहर ही रची गई है. हालत यहां तक पहुंच गई थी कि बिहार में वही बिहारी रह गया था जो अपनी किसी मजबूरी की वजह से बिहार नहीं छोड़ सकता था. उसके मन में भी यही लालसा होती की काश मैं भी बिहार से बाहर निकल पाता…
खैर… जो बिहार से बाहर नहीं निकल पायें… अब आप वहीं रूकिये… और अपने बिहार को वैसा बनाइये जैसा आप उसे देखना चाहते थे. नीतिशजी सुन रहे हैं न? अब ये लालू का नहीं आपका बिहार है. अच्छा हां, कोशिश कीजियेगा कि लालूजी का प्रधानमंत्री बनना हमेशा के लिए पैंडिग में चला जाये वरना एक और विस्थापन सह नहीं पायेंगे हम.
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3 Responses to “प्रधानमंत्री बनना अभी पैंडिग में है”
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अच्छा हां, कोशिश कीजियेगा कि लालूजी का प्रधानमंत्री बनना हमेशा के लिए पैंडिग में चला जाये वरना एक और विस्थापन सह नहीं पायेंगे हम.
–बिल्कुल सही. अबके सहना तो बड़ा ही मुश्किल होगा, भाई!!
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पैंडिग ही रहे तो अच्छा, वैसे इस देश में कुछ भी हो सकता है भाई!
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भारत के भाग्य में क्या लिखा है कौन जानता है? हम सिर्फ आशा रख सकते है. भगवान इतना निर्दयी भी नहीं हो सकता.
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