ख़बरें जो बेख़बर नहीं होने देतीं
Written by: शशि सिंह | January 2, 2007 | Category: सलाम ठोकता हूं | 2 Comments
ऐसा कम ही होता है कि आजतक (वो अपना सबसे तेज़) न्यूज़ चैनल कभी पते बात करे. वह दुर्लभ नजारा मुझे साल 2007 के पहले दिन ही देखने को मिल गया. वो ऐसा शायद इसलिए हो पाया होगा कि पहली जनवरी होने की वजह से बॉसेस छूट्टी पर होंगे और न्यूज़ रूम में अपने नीरज दीवान भाई जैसे टीवी के दबे-कुचले पत्रकारों को अपनी पत्रकारिता दिखाने का मौका मिल गया होगा. खैर, जब हमारे धर्म भाई जोश में आ ही गये तो जरा उनके बहादूरी (पत्रकारिता) की भी चर्चा कर ली जाये.
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