नौकरी चाहिये तो हिन्दी पढ़ो
Written by: शशि सिंह | January 4, 2009 | Category: ढाक के तीन पात | 3 Comments
क्या आप जानते हैं महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री की नौकरी जाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता आर.आर. पाटील इन दिनों क्या कर रहे हैं? इन दिनों वे अपनी हिन्दी सुधारने लगे हैं। आबा के नाम से मशहूर श्री पाटिल को मलाल है कि उनकी हिन्दी अच्छी नहीं होने के कारण उनके बयानों को गलत संदर्भ में लिया गया जिससे उनकी नौकरी चली गई। मतलब ये कि उन्होंने जो कुछ भी ग़लत हिन्दी में कहा उसका मतलब कुछ और था। (अब चलिये मतलब आप हिन्दी सीखकर कभी समझा दीजियेगा।)
आबा का इशारा अपने इन्हीं दोनों बयानों की तरफ है।
क्या आप जानते हैं महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री की नौकरी जाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता आर.आर. पाटील इन दिनों क्या कर रहे हैं? इन दिनों वे अपनी हिन्दी सुधारने लगे हैं। आबा के नाम से मशहूर श्री पाटिल को मलाल है कि उनकी हिन्दी अच्छी नहीं होने के कारण उनके बयानों को गलत संदर्भ में लिया गया जिससे उनकी नौकरी चली गई। मतलब ये कि उन्होंने जो कुछ भी ग़लत हिन्दी में कहा उसका मतलब कुछ और था। (अब चलिये मतलब आप हिन्दी सीखकर कभी समझा दीजियेगा।)
आबा का इशारा अपने इन्हीं दोनों बयानों की तरफ है।
मुम्बई पर आतंकी हमलों के संदर्भ में-
बड़े शहरों में ऐसी छोटी-छोटी घटनाएं होती रहती हैं : आर.आर. पाटील
बिहारी युवक राहुल राज के एन्काउंटर को सही ठहराते हुये-
हम गोली का जवाब गोली से देंगे: आर.आर. पाटील
अब ये भी सुन लीजिये ये बायन उन्होंने दिया क्यों? उप-मुख्यमंत्री की नौकरी जाने के बेरोजगार हुये इस नेता को महाराष्ट्र राज्य हिन्दी अकादमी एक कामचलाऊ नौकरी मिली है। इसी को जस्टीफाइ करते हुये उन्होंने नये साल में अपनी हिन्दी सुधारने की कसम खाई है। साथ ही वे यह भी कहते सुने गये कि इस नई नौकरी में रहते वे न सिर्फ अपनी हिन्दी सुधारेंगे बल्कि राष्ट्रभाषा को महाराष्ट्र में बाकिये के बीच भी प्रचारित करेंगे।
चलिये अच्छा है इसी बहाने पाटील साहेब को राष्ट्र और महाराष्ट्र का फर्क तो समझ में आया। वैसे एक बात बताइये पाटील साहेब, ये आप हिन्दी प्रचार किसके “राज” में करेंगे?






