यादों के घरौंदे में एक सोनचिरैया


Written by: शशि सिंह | August 14, 2006 | Category: बीती ताही विसरत नाही | Comment 
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लंबी बीमारी ने पत्रकार, गीतकार, कवियत्री और लेखिका सुमन सरीन के शरीर को जर्जर तो पहले ही कर दिया था शायद उस दिन मन ने भी हथियार डाल दिया होगा। अपने घरौंदे के गिर्द रहना चाह्ती थीं उस दिन, तभी तो पति की बांह पकड़ दफ्तर जाने से रोक लिया। उनके पति यानी नवभारत टाइम्स में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश सेंगर के मन में अपनी सुमन को लेकर की विदाई की शंका हुई।

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सोचा न था यूं होगी हमारी दूसरी मुलाकात


Written by: शशि सिंह | August 1, 2006 | Category: बीती ताही विसरत नाही | Comment 
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अभी कुछ महीने ही हुये थे मुझे और रघुनाथ को नवभारत टाइम्स ज्वाइन किये हुए. संपादक महोदय की शानदार 38 साल की पारी के बाद उनका विदाई समारोह था. वहीं हुई थीं सुमनजी से हमारी पहली मुलाकात. हमारे लिए बड़े भाईतुल्य उनके पति कैलाश सेंगर ने उनसे मेरा और रघुनाथ सरन का परिचय कराया.

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